होम लोन लेने से पहले क्या-क्या चेक करना चाहिए, home loan guide

होम लोन लेने से पहले क्या-क्या चेक करना चाहिए? पूरी जानकारी सरल भाषा में

एक छोटी सी कहानी – जहाँ से सीख मिलती है

राजेश और सुनीता का सपना था अपना खुद का घर। सालों तक EMI और किराए के बीच झूलते हुए उन्होंने आखिरकार हिम्मत की और बैंक जाकर होम लोन लिया। शुरू में सब कुछ ठीक लगा, लेकिन कुछ ही महीनों में परेशानी शुरू हो गई। EMI उनकी आय का 50% से ज़्यादा निकलने लगी, प्रोसेसिंग फीस और hidden charges भी उन्हें चुभने लगे, और प्रॉपर्टी पेपर्स में कुछ कानूनी पेंच फँस गए।

राजेश-सुनीता की कहानी अनोखी नहीं है। हममें से बहुत लोग ऐसे हालात का सामना करते हैं, क्योंकि लोन लेने से पहले सही चीज़ों की जांच नहीं करते। अगर आप भी होम लोन लेने वाले हैं, तो ज़रूरी है कि इन 10 बिंदुओं पर ध्यान दें ताकि आपका सपना घर परेशानी नहीं, बल्कि सुकून लेकर आए।


Step-by-Step गाइड – होम लोन लेने से पहले किन बातों पर ध्यान दें


1. ब्याज दर (Interest Rate) – सिर्फ संख्या नहीं, पूरी तस्वीर देखें

  • भारत में ज़्यादातर बैंक दो तरह की ब्याज दर देते हैं: फ्लोटिंग और फिक्स्ड

  • फ्लोटिंग ब्याज दर RBI की पॉलिसी रेट्स (जैसे Repo Rate) से जुड़ी होती है। यह घटती-बढ़ती रहती है।

  • फिक्स्ड ब्याज दर पूरी लोन अवधि तक एक जैसी रहती है।

👉 Pro Tip: सिर्फ ब्याज दर देखकर लोन मत चुनें। साथ में processing fees, hidden charges और prepayment penalties भी जोड़कर देखें।


2. EMI कैलकुलेशन – बजट बिगाड़े बिना सही EMI चुनें

  • ऑनलाइन EMI Calculator से पहले से जान लें कि आपकी EMI कितनी बनेगी।

  • आपकी EMI आपकी मासिक आय का 30–40% से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए।

  • लंबा टेन्योर = कम EMI लेकिन कुल ब्याज ज़्यादा। छोटा टेन्योर = EMI थोड़ी ज़्यादा लेकिन ब्याज कम।

उदाहरण:
अगर आपकी आय ₹60,000 है तो EMI ₹18,000–20,000 तक ही रखें। इससे जीवनशैली और अन्य ज़रूरी खर्च पर असर नहीं पड़ेगा।


3. टेन्योर (Tenure) – लंबा या छोटा? सही बैलेंस चुनें

  • ज़्यादा लंबा टेन्योर (20–30 साल) EMI को manageable बनाता है लेकिन कुल ब्याज बहुत बढ़ा देता है।

  • छोटा टेन्योर (10–15 साल) कुल ब्याज कम रखता है, लेकिन EMI ज्यादा हो सकती है।

  • अपनी उम्र, आय और भविष्य की योजनाओं के अनुसार टेन्योर तय करें।

👉 Checklist: क्या आप आने वाले 10–15 साल तक स्थायी नौकरी/आय की उम्मीद रखते हैं? अगर हाँ, तो छोटा टेन्योर बेहतर रहेगा।


4. दस्तावेज़ (Documents) – अधूरे पेपर्स से लोन अटक सकता है

बैंक आम तौर पर ये दस्तावेज़ मांगते हैं (ICICI Bank, Axis Bank):

  • Identity Proof: Aadhaar, PAN, Passport

  • Address Proof: बिजली बिल, Rent Agreement

  • Income Proof:

    • Salaried: Salary Slip (पिछले 3–6 महीने), Form-16

    • Self-employed: ITR, Balance Sheet, Profit & Loss Statement

  • Property Documents: Sale Deed, Title Deed, Approved Building Plan, NOC आदि

👉 Tip: सभी दस्तावेज़ साफ और updated हों ताकि लोन प्रोसेस जल्दी हो।


5. लोन-टू-वैल्यू (LTV) और डाउन पेमेंट

  • RBI नियमों के अनुसार बैंक प्रॉपर्टी की वैल्यू का लगभग 70–90% तक ही लोन देते हैं।

  • बाकी राशि आपको डाउन पेमेंट के रूप में खुद करनी होगी।

  • बड़ा डाउन पेमेंट करने से आपका ब्याज बोझ घटेगा और बैंक आपके प्रति अधिक भरोसेमंद रहेगा।


6. क्रेडिट स्कोर – आपकी साख ही आपकी ताक़त है

  • CIBIL Score 750+ होना आदर्श माना जाता है।

  • अच्छा स्कोर = कम ब्याज दर + आसानी से लोन अप्रूव।

  • पुरानी देनदारियाँ, EMI default या क्रेडिट कार्ड बकाया आपके स्कोर को गिरा सकते हैं।

👉 Pro Tip: लोन लेने से 6–8 महीने पहले अपने स्कोर को सुधारने की कोशिश करें।


7. प्रोसेसिंग फीस और Hidden Charges – छोटे अक्षरों को ज़रूर पढ़ें

  • बैंक प्रोसेसिंग फीस, लॉयर फीस, वैल्यूएशन फीस, स्टांप ड्यूटी, और टेक्निकल चार्जेस लेते हैं।

  • कुछ बैंक pre-payment penalty या foreclosure charges भी लगाते हैं।

  • हमेशा Terms & Conditions को ध्यान से पढ़ें।

👉 Example:
एक बैंक 7.5% ब्याज दर दे रहा है लेकिन processing fees ₹50,000 है। दूसरा बैंक 7.75% पर लोन दे रहा है लेकिन processing fees सिर्फ ₹10,000 है। कभी-कभी दूसरा विकल्प बेहतर होता है।


8. प्रॉपर्टी वैरिफिकेशन और कानूनी जांच

  • Property का Title clear होना चाहिए।

  • Approved building plan, Completion Certificate, Occupancy Certificate, NOC सब कुछ जांचें।

  • किसी भरोसेमंद वकील से दस्तावेज़ों की cross-verification कराएँ।

👉 External Reference: RERA Portal पर जाकर प्रोजेक्ट और बिल्डर की वैधता ज़रूर चेक करें।


9. टैक्स लाभ और सरकारी योजनाएँ

  • Income Tax में धारा 80C (Principal) और धारा 24B (Interest) के तहत राहत मिलती है।

  • Pradhan Mantri Awas Yojana (PMAY) के तहत पहली बार घर खरीदने वालों को CLSS (Credit Linked Subsidy Scheme) मिल सकती है।

  • टैक्स बेनिफिट्स आपके लोन को बहुत सस्ता बना सकते हैं।


10. प्रीपेमेंट और फॉरेक्लोज़र पॉलिसी

  • अगर आप लोन जल्दी चुकाना चाहते हैं, तो जान लें कि बैंक प्रीपेमेंट की अनुमति देता है या नहीं।

  • RBI ने फ्लोटिंग रेट लोन पर प्रीपेमेंट पेनल्टी हटाई है (RBI Notification), लेकिन फिक्स्ड रेट लोन पर यह अभी भी लागू हो सकती है।

👉 Pro Tip: लोन लेने से पहले पूछें – क्या मैं अतिरिक्त भुगतान करके अपना लोन जल्दी बंद कर सकता हूँ?

 

ये भी पढ़ें– Gold Loan लेने से पहले रखें इन 9 बातों का ध्यान — वरना बाद में पड़ सकता है पछताना

अधिक जानकारी के लिए यह वीडियो देखें–

ये भी पढ़ें–

RBI GUIDELINE FOR HOME LOAN

 


✅ रियल-लाइफ़ केस स्टडीज़

उदाहरण गलती सही उपाय
अजय & सीमा लंबा टेन्योर चुना, EMI कम रही लेकिन ब्याज बहुत ज़्यादा चुकाया छोटा टेन्योर + थोड़ा बड़ा डाउन पेमेंट
रवि प्रॉपर्टी पेपर्स की कानूनी जांच नहीं करवाई पहले वकील से वैरिफिकेशन करवाना चाहिए था
प्रिया बैंक की प्रीपेमेंट शर्तें नहीं पढ़ीं, बाद में penalty लगी Terms & Conditions शुरू में ही पढ़नी चाहिए थी

अन्य ज़रूरी सवाल (Self-Checklist)

  • क्या मेरी EMI मेरे बजट के अनुकूल है?

  • क्या ब्याज दर स्थिर है या बदलने वाली?

  • क्या मेरी नौकरी/आय स्थिर है?

  • क्या मेरी प्रॉपर्टी कानूनी रूप से साफ है?

  • क्या मैंने hidden charges और प्रोसेसिंग फीस सब पढ़े हैं?


निष्कर्ष

घर खरीदना हर किसी का सपना होता है, लेकिन सही जानकारी के बिना लिया गया लोन बोझ बन सकता है। अगर आप ब्याज दर, EMI, क्रेडिट स्कोर, प्रॉपर्टी की वैधता और hidden charges पर ध्यान देंगे, तो होम लोन आपके लिए एक वरदान साबित होगा।


Call to Action (CTA)

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